मंदिर के बारे मे जाणकारी

श्री मॉ दुर्गा का प्राचीन पहाडी कि तलहटी मे विराजमान अत्यंत प्राचीन मंदिर पहाडी जंगलो से घीरा था | मंदिर के पास हि एक कॅुआ तथा बेल निम के झाड थे | धार्मिक श्रध्दालु भक्तो का यहॉ आना जाना था | कहॉ जाता है, कि वाकाटक, गोंड और भोंसले राजा यहॉ आते रहते थे | अत्यंत प्राचीन काले पत्थरो के इस मंदिर में मॉ दुर्गा व काल भैरव कि मूर्ती स्थापित थी | मंदिर के चारो बाजू पत्थरो का बना चबुतरा (पटांगन) था | भाविक यहॉ आकार मानता मानकर बकरे या मुर्गे कि बली देकर यहॉ खाना बनाकर अपने स्वजन परिचितों के साथ सहभोज आयोजित करते थे |

अंग्रेजो के आगमन के पश्चात उन्होने मध्यभारत मे अपना गवर्नर नियुक्त करने हेतू सेन्ट्रल प्राव्हिस के लिये गव्हर्नर हाऊस का निर्माण करने के लिये नागपूर कि इसी पहाडी का चुनाव किया | पहले पहाडी के उपरी भाग को समतल करके वहॉ निर्माण शुरू किया | गवर्नर हाऊस कि संपूर्ण जमीन को अंग्रेजो ने खसरा नं. 97 तथा मंदिर कि जमीन का खसरा नं. 98 दिया गया| उसी प्रकार सेन्ट्रल प्राव्हिंस कंपनी (C.P.M.O) बनाकर उसके दो अंग्रेज अधिकारियो के रहने के लिये मंदिर कि जमीन को छोडकर उसके पिछे गव्हर्नर हाऊस से लगी जमीन खसरा क्र. 99, 100 व 101 गोपालराव मुकुंदराव बुटी, मालक सिताबर्डी कि * बुटीवाडी * थी | जो महाराज रघुजी भोसले ने मंदिर कि देखभाल करने बुटी को दी थी | जिसमे 2 बंगले थे | उन्हे किराये पर कंपनी अंग्रेज अधिकारियो को दिया था | उन्होने लोहे के तार की फैसिंग लगा रखी थी | कंपनी ने मैगनीज की खदानो का काम शुरू करने से उसका नाम सेंट्रल प्राव्हिंस मैगनीज ओर (C.P.M.O) रखा गया| कंपनी के दो बडे अंग्रेज अधिकारियो को भाविको कि बनाई सब्जी पसंद आती थी उसे नौकरो के जरीये बुलाकर खाते थे | स्वतंत्रता के बाद भी अंग्रेज इस कंपनी को चलाते थे | परंतु 19 वे शतक मे 1980 के पश्चात भारत सरकार ने इस कंपनी को अपने अधिकार मे ले लिया | तब उन्होने इस का नाम बदल के मैगनीज ओर इंडिया लिमिटेड (MOIL) रखा उन्होने मंदिर का कॅुआ और बेल निम के झाड व लोगो के खाना व खाने कि जमीन कंपाऊड वॉल निर्माण करके मंदिर कि बहुत बडी जमीन अपने कब्जे मे ले ली | इन दोनो बंगलो के बीच बहुत बडा मैदान खाली पडा था | मंदिर संस्थान ने इस जमीन पर नागपूर कॉटन मार्केट कि गणेश व धंतोली कि दुर्गापूजा प्रदर्शन के धरातल पर यहॉ प्रदर्शन लगाने हेतू मॉयल से अनुमती लेकर नवरात्र के अवसर पर ‘‘दुर्गा उत्सव प्रदर्शनी’’ का आयोजन किया जाने लगा क्योकि यह मैदान मंदिर कि जमीन से लगा हुआ था | पिछले करीब 5 वर्षो से इस मैदान पर ‘मॉयल’ ने अपना कार्यालय निर्माण करने से प्रदर्शनी बंद हो गयी | उसी प्रकार मॉयल के बाजु अंग्रेजों का सी. पी. ग्राउंड था | जिस पर आस पास के बच्चे हमेशा खेलते क्रिकेट फुटबॉल तथा हॉकी का आयोजन श्री दुर्गा माता मंदिर संस्थान करता था |

यह मंदिर मॉयल के कंपाऊड के उत्तर और काटोल रोड के दक्षिण, छावनी बस्ती से लगा हुआ है | छावनी के रहवासी इस मंदिर का संचालन पहले पंच कमेटी और बाद 1983 मे चेरेटी कमिश्नर से रजिस्ट्रेशन करके श्री दुर्गामाता मंदिर संस्थान व्दारा कर रहे है | काटोल रोड को चौडा करणे हेतू म.न.पा. व एन.आय.टी ले कमिश्नर श्रीमान चंद्रशेखर ने मंदिर के मॉ प्रार्थना भवन के उपर अधिक से अधिक मंजले बांधकाम हेतु एफ. एस. आय. देने का आश्वासन देकर मंदिर के सामने कि रोड से लगी बहुत बडी जमीन लेकर मार्ग का विस्तारीकरण किया | इस प्रकार पहले मंदिर कि जमीन मॉयल व रोड विस्तारी करने में चली गयी |

ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन के पहले मंदिर पंचकमेटी मंदिर का संचालन करती थी | सन 1963-64 मे मंदिर के पिछे कि जमीन को खसरा नं. 98/1 देकर राज्य सरकार व्दारा पुलिस खाते को दी गयी थी | पुलिस विभाग का सदर पोलिस स्टेशन बनाने का कार्य शुरू होने के बाद भाविको व नागरीको को यह बात अच्छी नही लगने से बहुत बडे आंदोलन का रूप ले लेने से पंचकमेटी के लोग रामगिरी बंगले पर तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक से जाकर विनंती करने पर उन्होने वहॉ आना स्वीकार किया | वहॉ आकर पूजापाठ करके आम नागारीको-भक्तो के सामने कहा कि यह मंदिर कि जमीन है | यह मंदिर मंदिर अतिप्राचीन विरासत है पुलिस विभाग को दुसरी जमीन दि जायेगी | उस समय नागपूर के कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर व महसूल कमिश्नर इत्यादी अधिकारी व नेता उपस्थित थे | उन्होने तुरंत काम बंद करके जमीन जिसे खसरा नं. 98/1 दिया था मंदिर के सुपुर्द करणे का आदेश दिया | इसप्रकार मंदिर के पिछे कि जमीन वापस मंदिर को प्राप्त हुई | पुरानी पंचकमेटी के लोगो ने उस आधे-अधुरे निर्माण के संस्था पर मंदिर मॉ का भवन बनाने का विचार किया ताकि और कोई अन्य इस पर कब्जा ना कर के | इस प्रकार मा. स्व. वसंतराव नाईक को पाया भरणी कार्यक्रम के लिये आमंत्रित किया | उस समय नागपूर म.न.पा. के मेयर मा. सखाराम मेश्राम, तथा मंदिर पंचकमेटी के अध्यक्ष व म.न.पा. स्टेटींग कमेटी के चेयरमैन स्व. शंकरराव खंडेश्वर तथा गोंदिया के उद्योगपती स्व. मनोहर भाई पटेल इस कार्यक्रम मे हाजीर थे उन्होने आम जनता कि सुविधा के लिये मॉ प्रार्थना भवन का निर्माण करने हेतू मनोहर भाई पटेल को कहने पर उन्होने आश्वासन दिया | उन्होने प्राचीन मंदिर के जगह नया मंदिर बनाने मे 1960 मे पंचकमेटी को मदत किया | उनकी सहायता से काम शुरू होने के बाद सिर्फ उपर जंगली बेलबुटे व झाडी का जंगल हो गया | मंदिर संस्थान का रजिस्ट्रेशन होकर नयी कार्यकारणी मे पुरानी पंचकमेटी के लोग भी थे | उन्होने तथा बस्ती के बडे बुजुर्गो ने मॉ भवन का जल्द जल्द निर्माण शुरू करने का दबाव नये मंदिर ट्रस्ट पर डालने से मंदिर के आवक नही थी | इतना पैसा कहॉ से लाया जाये | तब कार्यकारणी ने ठहराया कि प्रत्येक जितना अधिक से अधिक दे सकता देकर पहले काम शुरू किया जाये | सभी ने मदत कि और काम शुरू किया परंतु जल्द हि पैसे खत्म होने से काम पुन्ह बंद पड गया | इसके लिये एक नयी योजना ड्रॉ निकालकर लोगो को इनाम देने कि ‘इनामी योजना’ शुरू कि | जिससे पैसा आने लगा | परंतु बाद मे मा. कलेक्टर ने यह योजना करमणूककर विभाग व्दारा बंद कर दी | तब जब रात में प्रदर्शनी लगाकर पैसा एकत्रित किया जाने लगा | प्रदर्शनी लगाने पर दूर दूर से लोग परिवार सहित आने लगे | उनको नवरात्र मे माताश्री के दर्शन और प्रदर्शनी का आनंद दोनो मिलने से लाखो कि संख्या मे भीड बढ गयी | तब से इस मंदिर कि प्रसिद्धी दूर-दूर तक फैल गयी| आनेवाले भाविको कि संख्या मे वृद्धि होने से मंदिर कि आय बढ गयी धर्म पेटी से तथा दान देणगी से भी मंदिर का आवक बढने लगी | नवरात्र मे अखंड मनोकामना ज्योती का भी आयोजन होने लगा | मॉ प्रार्थना भवन मे चैत्र व अश्विन नवरात्र मे ज्योती कि स्थापना होती है| इससे आवक बढने लगी मंदिर के भवन का काम पुरा हो सका जिसका सपना, इस क्षेत्र के बुजुर्ग नागरिको ने देखा था उसे मंदिर संस्थान ने पुरा किया |

1960 मे बने मंदिर कि इमारत पुरानी होने से जर्जर हो गयी है | उसके छज्जे टुट कर गिर रहे है, स्लॅब लिकेज होने से पानी आता है | अंतः मंदिर का जीर्णोदार करने का निर्णय मंदिर संस्थान ने किया है | मंदिर कि अति प्राचीन जमीन पहाडी के नीचे वाकाटक राजाओ कि कुलदेवी मानी जाने वाली मॉ दुर्गा व कालभैरव यहॉ विराजमान है | गणेशजी व शिवलिंग कि पूजा होती है | सन 1970 मे सिटी सर्व्हे विभाग बना | उन्होने सर्व्हे करके सर्व्हे क्रमांक दिया | उसमे मंदिर के चारो ओर कि जमीन को 2475 व मंदिर को 2475 दिया | मंदिर को मंदिर कि जमीन से बेदखल करने का षडयंत्र करके राज्य शासन लिख दिया | इस जमीन से मंदिर मे जाने तक का रोड नही बताया इससे मंदिर संस्थान अडचन मे पड गया | इस प्रकार मंदिर कार्यक्रमो के आयोजन कि जमीन को जिल्हाअधिकारी कार्यालय ने नझूल कि बताकर मंदिर संस्थान को जमीन से बेदखल करने कि सरकारी नीती सतत चालती रही |

इस कारण मंदिर संस्थान को अनेक कठिणाईयों का सामना करना पड रहा है | कुछ लोग परिसर मे जबरदस्ती दुकान लगाकर बैठने लगे | इससे मंदिर का विकास मे रोड उत्पन्न हो गया | नझुल विभाग ने पुरानी फाईल गुम होनेका बताकर, नई फाईल बनाने के लिये पुन्ह कलेक्टर कि ओर 1983 मे उनके कहने से जमीन नाम चढाने हेतू जमीन मांगणी का अर्ज दाखल किया | सतत कार्यवाही करके अनापत्ती पत्र मंगाकार तहसीलदार व्दारा 1 लाख के करीब दंड व हर्जाना भरने लगाया है | इस प्रकार मंदिर संस्थान को जमीन से बेदखल करके मंदिर विकास कार्यो मे रुकावट डालने मे मा. कलेक्टर भूमी अभिलेख अधिक्षक कार्यालय दोषी है | मा. गवर्नर ने राजभवन कि जमीन खसरा क्रमांक 97 मे से पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कन्नमवारजी कि व्हिलेज अपलिफ्त सोसायटी को मंदिर व मॉयल के बाजू मे तीन एकड जमीन दी, उसके बाजू शासकीय जिल्हा परिषद कन्याशाला, उसके बाजू समाज कल्याण लडकीयो वसतीगृह, उसके बाजू विदर्भ रिलीफ सोसायटी उसके अध्यक्ष मा. महसूल आयुक्त, उसके बाजू निर्मला गर्ल्स हॉस्टेल कि जमीन दी | जिसका दुर्पयोग हो रहा है | परंतु मंदिर कि प्राचीन जमीन मंदिर संस्थान को देने मे जिल्हाधिकारी कार्यालय मे अभी तक कार्यवाही प्रलंबीत है | अत्यंत दुःख कि बात समाज व इस क्षेत्र के निवास भाविको तथा हिंदू समाज पर बडा अन्याय है |